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  • काकोरी के शहीदों की याद में विभिन्न साझे कार्यक्रमों का आयोजन

    Date:19 Dec 2017

    रामनगर(उत्तराखंड) में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा काकोरी कांड के शहीदों को याद करते हुए संयुक्त तौर पर स्थानीय लखनपुर चुंगी स्थित शहीद पार्क पर एक सभा का आयोजन किया गया।

    सभा में वक्ताओं ने काकोरी के शहीद राम प्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी, अशफाक उल्लां खां, और रोशन सिंह के क्रांतिकारी जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा रामनगर(उत्तराखंड) में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा काकोरी कांड के शहीदों को याद करते हुए संयुक्त तौर पर स्थानीय लखनपुर चुंगी स्थित शहीद पार्क पर एक सभा का आयोजन किया गया।

    सभा में वक्ताओं ने काकोरी के शहीद राम प्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी, अशफाक उल्लां खां, और रोशन सिंह के क्रांतिकारी जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आजादी के आंदोलन में राम प्रसाद बिस्मिल व अशफाक उल्लां खां की दोस्ती हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक थी। 1857 के विद्रोह में हिन्दू-मुस्लिम एकता को देखकर अंग्रेजों ने भारत में हिन्दू मुस्लिम एकता को तोड़ने के लिए साम्प्रदायिकता को पैदा किया तथा इस तरह आजादी के संघर्ष को कमजोर करने की कोशिश की। लेकिन राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लां खां की शहादत ने अंग्रेजों की इस साजिश को सफल नहीं होने दिया।

    सभा में आज के समय में इन शहीदों को याद करने की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि काकोरी के शहीदों का सपना एक समाजवादी भारत को बनाने का था जो आज हमारा कार्यभार बनता है। आज जब भारत में साम्प्रदायिक संगठनों के सत्ता पर आसीन होने के बाद से समाज में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा व वैमनस्य का जो वातावरण तैयार किया जा रहा है तब ऐसे समय में हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक अशफाक उल्लां खां और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती की मिसाल,देश के लिए उनके बलिदान और धर्मनिरपेक्ष व समाजवादी भारत के उनके सपने कोे समाज में प्रचारित करने की जरूरत बनती है।

    रुद्रपुर ( उत्तराखंड) में 19 दिसम्बर को काकोरी के शहीदों के बलिदान दिवस पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र व इंटरार्क मजदूर संगठन,सिडकुल पंतनगर के कार्यकर्ताओं ने ट्रांजिट कैंप, रुद्रपुर में प्रभात फेरी निकाली और सिडकुल औद्योगिक केन्द्र के प्रवेश द्वार पर एक सभा की । सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज मोदी सरकार पूंजीपतियों की सेवा पूरी तरह नतमस्तक है। एक तरफ वह मजदूरों के श्रम अधिकारों को कांट छांट कर उन्हें निष्प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है ,जनता के अधिकारों को छीन रही है व उनका दमन कर रही है तो दूसरी तरफ वह देश को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंक रही है। मोदी व भाजपा के बिरादर व सहोदर संघमंडली के लोग मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ ‘लव-जिहाद‘, ‘घर वापसी‘, ‘मंदिर-मस्जिद‘,‘गौ-रक्षा‘ आदि के नाम पर नफरत की अंाधी बहा रहे हैं। संघी फासीवादी मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर नृशंश व क्रूर हमले कर रहे हैं। विगत एक साल में अखलाक, पहलू खान ,जुनैद के बाद अब अफराजुल की नृशंश हत्या इसी को प्रदर्शित करती है। सभा में वक्ताओं ने संघी फासीवाद के खिलाफ संघर्ष को आज के दौर में मजदूर वर्ग की मुख्य चुनौती बताया व इसके खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया। सभा में जोशो-खरोश के साथ “अशफाक स्मिल के देश में, घर्म के धंधे नहीं चलेंगे“, लड़ो न अल्लाह राम पर, लड़ो मजूरी-काम पऱ“, “जाति- धर्म में नहीं लड़ेंगे,मिलजुल कर संघर्ष करेंगे“, “पूंजीवाद हो बर्बाद“, “मजदूर राज जिंदाबाद“ आदि नारे लगाये गये।

    काशीपुर(उत्तराखंड) में काकोरी के शहीदों की याद में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र व पछास द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित पर्चे का वितरण किया गया व 17 दिसंबर को स्थानीय पंत पार्क में एक सभा आयोजित की गयी। सभा के बाद शहर में एक जुलूस निकाला गया।

    हरिद्वार में 17 दिसंबर को काकोरी के शहीदों के शहीदी दिवस पर एक स्थानीय मजदूर इस्ती रावली महदूद में सुबह 6 बजे से प्रभात फेरी निकाली गयी। इस अवसर पर “हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक राम प्रसाद बिस्मल की दोस्ती अमर रह“, “हिन्दू फासीवाद मुर्दाबाद“, “सांप्रदायिकता मुर्दाबाद“, “काकोरी के शहीदों को लाल सलाम“ व पूंजीवाद-साम्राज्यवाद का नाश हो“ आदि नारे लगाये गये।

    गुड़गांव (हरियाणा) में 17 दिसंबर को काकोरी शहीदों के शहीदी दिवस नागरिक पत्र द्वारा आयोजित सेमिनार में गुड़गांव,फरीदाबाद व दिल्ली के इमके,पछास प्रमएके के साथियों के अलावा मजदूर सहयोग केन्द्र,सी पी आइ(एम एल,रेड स्टार) के कार्यकर्ताओं, विभिन्न ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों व वभिन्न पत्र पत्रिकाओं से जुड़े पत्रकारों-बुद्विजीवियों ने भागीदारी की।

    इसी क्रम में मऊ(उत्तरप्रदेश) में काकोरी के शहीदों की याद में 19 दिसम्बर को इंकलाबी मजदूर केन्द्र व क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा संयुक्त तौर पर एक जुलूस निकाला गया। उत्तरप्रदेश के बरेली में काकोरी के शहीदों को याद करते हुए 17 दिसंबर को एक विचार गोष्ठी की गयी। इससे पूर्व शहर के विभिन्न हिस्सों व औद्योगिक इलाके में पर्चे का वितरण किया गया।

  • श्रम कानूनो में मज़दूर विरोधी परिवर्तनों पर विचार गोष्ठी

    Date:19 Nov 2017

    हरिद्वार : इंकलाबी मजदूर केंद् व भेल मजदूर ट्रेड यूनियन द्वारा श्रम कानूनों मे प्रस्तावित मजदूर विरोधी परिवर्तनों पर एक विचार गोष्ठी की गई | विचार गोष्ठी का विषय " श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन व हमारे कार्यभार " था | गोष्ठी का संचालन करते हुए बी. एम.टी.यू के अध्यक्ष राज किशोर ने कहा कि नई आर्थिक नीति (1991) के लागू होने से ही कांग्रेस संयुक्त मोर्चा व भाजपा की सरकारो ने इन न

    हरिद्वार : इंकलाबी मजदूर केंद् व भेल मजदूर ट्रेड यूनियन द्वारा श्रम कानूनों मे प्रस्तावित मजदूर विरोधी परिवर्तनों पर एक विचार गोष्ठी की गई | विचार गोष्ठी का विषय " श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन व हमारे कार्यभार " था | गोष्ठी का संचालन करते हुए बी. एम.टी.यू के अध्यक्ष राज किशोर ने कहा कि नई आर्थिक नीति (1991) के लागू होने से ही कांग्रेस संयुक्त मोर्चा व भाजपा की सरकारो ने इन नीतियों (निजीकरण, उदारीकरण वैश्वीकरण) को पूं जी के हित में तेजी से आगे बढ़ाया है ।

    गोंष्ठी में इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी ने श्रम कानूनों में घोर मजदूर विरोधी परिवर्तनों पर बात रखी । इस में बताया गया कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा 38 श्रम कानूनों को खत्म कर चार कोड में सीमित कर भाजपा ने देश के पूंजीपतियों को यह भरोसा दिलाया कि वे पूंजीपतियों सेवा में मजदूरों व देश की गरीब जनता के खिलाफ कहीं तक भी जा सकते हैं ।

    गोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने बात रखते हुए कहा कि अभी लोकसभा में पहला कोड मजदूरी संबंधी रखा गया । जिसके पास होते ही पुराने कानून -मजदूरी भुगतान कानून 1936, न्यूनतम मजदूरी कानून 1948, बोनस कानून 1965 व समान काम का समान वेतन कानून 1976 -स्वत: ही समाप्त हो जाएंगे । नए पहले कोड में ही मजदूरों के कानूनी अधिकारों की औपचारिकताएं भी समाप्त कर दी गई हैं। अन्य कोड भी मजदूरों को 150 साल पुरानी स्थिति में ले जायेंगे

    गोष्ठी में इ.म.के. व बी.एम.टी.यू.के अलावा क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, SC वेलफेयर एसोसिएशन,ST एसोसिएशन, आई०टी०सी० व अन्य फैक्ट्री के मजदूरो ने भागीदारी की ।

  • जोशो खरोश के साथ मनाई गयी महान अकटूबर समाजवादी क्रान्ति की सौवीं वर्षगाँठ
    सभा, जुलूस सहित विविध कार्यक्रम

    Date:07 Nov 2017

    रूद्रपुर(उत्तराखंड) : महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति की सौवीं वर्षगांठ के अवसर पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर के बैनर तले विभिन्न यूनियनों, मजदूर संगठनों एवं समाजिक सगठनों द्वारा राम सुमेर शुक्ला पार्क, निकट रोडवेज बस अड्डा रुद्रपुर में सभा की गई । सभा पश्चात् शहर में जुलूस निकाला गया। सभा मे वक्ताओं ने अक्टूबर क्रांति एवं उसके विश्व ब्यापी प्रभाव के बारे में बताय

    रूद्रपुर(उत्तराखंड) : महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति की सौवीं वर्षगांठ के अवसर पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर के बैनर तले विभिन्न यूनियनों, मजदूर संगठनों एवं समाजिक सगठनों द्वारा राम सुमेर शुक्ला पार्क, निकट रोडवेज बस अड्डा रुद्रपुर में सभा की गई । सभा पश्चात् शहर में जुलूस निकाला गया। सभा मे वक्ताओं ने अक्टूबर क्रांति एवं उसके विश्व ब्यापी प्रभाव के बारे में बताया। इमके के अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश भारत के आजादी के आंदोलन में क्रांतिकारी धारा के भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, ऊधम सिंह आदि रूसी अक्टूबर क्रांति से प्रभावित होकर देश में मजदूर राज-समाजवाद लाने के लिए संघर्षरत रहे और शहीद हो गए।

    आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी आज मजदूर-मेहनतकश जनता की हालत बद से बदतर होती जा रही है। मोदी सरकार के साढे तीन साल के शासनकाल मे मजदूर-मेहनतकश जनता की हालत और ज्यादा खराब हुई है।

    देश के मजदूर-मेहनतकश जनता की समस्याओं का समाधान मजदूर राज - समाजवाद में ही होगा। इसलिए मजदूर-मेहनतकश जनता को मजदूर राज समाजवाद के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाना होगा और देश में मजदूर राज समाजवाद लाना होगा।

    सभा एवं जुलूस में श्रमिक संयुक्त मोर्चा , इंटरार्क मजदूर संगठन (पन्तनगर), इंटरार्क मजदूर संगठन (किच्छा) , ऑटोलाइन इम्पलाइज युनियन, CIE श्रमिक संगठन, मंत्री मेटालिक यूनियन, यजाकि वर्कर यूनियन, राने मद्रास इम्पलाइज यूनियन, ब्रिटानिया श्रमिक संघ, पारले श्रमिक संघ, टी.वी.एस.लुकास, एरा श्रमिक संगठन, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, मजदूर सहयोग केन्द्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, एक्टू , सी.पी.आई., आदि संगठनों के लोगों ने भागीदारी की।

    ,p> इससे पूर्व 7 नवम्बर को प्रात: इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं द्वारा ओद्योगिक अस्थान सिडकुल के आवास विकास की ओर के प्रवेश द्वार पर पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई ।इस दौरान मजदूरों को सम्बोधित करते साथियों ने दोपहर 2:15 बजे से श्रमिक संयुक्त मोर्चा उधम सिंह नगर द्वारा महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति की सौवीं वर्षगांठ पर रखे गए सभा व जुलूस के कार्यक्रम में भागीदारी कर कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया ।इस दौरान अक्टूबर क्रांति की महत्ता को स्थापित करते हुए पर्चा वितरण भी किया गया । इस दौरान " हर जोर जुल्म का जवाब इंकलाब" "मजदूरों मेहनतकशों की हर समस्या ,हर दुख तखलीफ़ का जवाब है , इंकलाब" "भगत सिंह का ख्वाब अधूरा, इस सदी में होगा पूरा " आदि नारे लगाये गये।

    पंतनगर (उत्तराखंड) में इंकलाबी मजदूर केन्द्र एवं ठेका मजदूर कल्याण समिति, पंतनगर द्वारा महान अक्टूबर समाज वादी क्रान्ति की 100 वीं वर्षगांठ के अवसर पर पंतनगर परिसर की विभिन्न कालौनियो से होते हुए प्रभातफेरी निकाली गई। प्रभातफेरी में क्रांतिकारी गीत व " सम्राज्यवाद मुर्दाबाद", "पूंजीवाद मुर्दाबाद" "समाज वाद जिन्दाबाद" व "महान अक्टूबर क्रांति अमर रहे "आदि नारे लगाते हुए पंतनगर शहीद स्मारक पर नुक्कड़ सभा के साथ समापन किया गया।

    मजदूर वर्ग की विचारधारा मार्क्सवाद को आधार बनाकर वर्गीय एकता के आधार पर संगठित होकर संघर्ष. के जरिए पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ कर समाजवादी व्यवस्था - मजदूर राज्य कायम किया था। मजदूर राज्य में समाजवादी सरकार ने देश के सभी नागरिकों को आवास, शिक्षा , स्वास्थ्य का निशुल्क इंतजाम किया । महिला पुरूषों को पह। मजदूर वर्ग की विचार धारा वर्गीय एकता के आधार पर संघर्षो को रूस की तर्ज पर पूजीबादी व्यवस्था का खात्मा एवं समाज बादी व्यवस्था कायम करने के संघर्ष को आगे बढाने का संकल्प लिया गया

    रामनगर, (उत्तराखंड) में 7 नवंबर को परिवर्तनकामी छात्र संगठन ,इमके और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा अक्टूबर क्रान्ति की सौंवी सालगिरह पर कार्यक्रम किया गया आज भारतीय समाज की समस्याओं का हल अक्टूबर क्रान्ति जैसी क्रान्ति ही कर सकती है ।ऐसी ही क्रांति का सपना भगत सिंह और उनके साथी देखते थे । लालकुआँ (उत्तराखंड) में 7 नवंबर को इंकलाबी मजदूर केन्द्र व परिवर्तनकामी छात्र संगठन,प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने अक्टूबर क्रांति की सौवीं वर्षगांठ पर जुलूस निकाला । नयी समाजवादी क्रांति की राह चुनने का आहवान किया।

    हरिद्वार में अक्टूबर क्रांति की सौवीं वर्षगांठ के अवसर पर 7 नवम्बर को इंकलाबी मजदूर केंद्र , मजदूर ट्रेड यूनियन , क्रान्तिकारी लोक अधिकार संगठन कार्यकर्ताओं द्वारा साइकिल रैली निकाली गयी तथा इसके माध्मयम से महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति के संदेश को प्रचारित करने का प्रयास किया । साइकिल रैली सुभाष नगर से शुरू करके भेल पुनर्वास से होते हुए शास्त्री नगर , बी०एच,०ई०एल० सैक्टर-4 होते हुए ब्रह्मपुरी , रावली महमूद , सलेमपुर , रोशनाबाद होते हुए सिडकुल से सैक्टर-4 भेल मजदूर ट्रेड यूनियन कार्यालय पर सम्पन्न हुई |

    बरेली (उ.प्र) में अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी पर इंकलाबी मजदूर केंद्र ,परिवर्तनकामी छात्र संगठन ,क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन ,प्रगतिशील महिला एकता केंद्र व प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच द्वारा सभा की गई तत्पश्चात शहर में जुलूस निकाला गया । मऊ (उ.प्र) महान अक्टुबर क्रांति की सौवीं वर्षगांठ पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र व क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा जुलूस निकाला गया।

    फरीदाबाद में 7 नवम्बर को महान अक्टूबर क्रांति की सौवीं वर्षगांठ पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र व वीनस वर्कर्स यूनियन ने इंडस्ट्रियल एरिया, सेक्टर 2व पंजाब रोलिंग चौक पर एक सभा की। सभा में मजदूर साथी लाल झंडों, बैनर व पोस्टर के साथ लेनिन, स्तालिन व शहीदे आजम भगत सिंह के छाया चित्र हाथों में लिए हुए थे ।सभा में वक्ताओं ने क्रांति के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह क्रांति एक युगान्तरकारी घटना थी । इस क्रांति ने साम्राज्यवाद की प्रत्यक्ष गुलामी के दौर को खत्म कर दिया तथा पूरी दुनिया में जनवाद का विस्तार किया आदि ।

    दिल्ली में इमके व पछास के कार्यकर्ताओं द्वारा एक मजदूर बस्ती शाहबाद डेरी स्थित राणा प्रताप चौक पर एक संक्षिप्त सभा की गयी जिसमें अक्टूबर क्रान्ति के महत्व व आज के दौर की चुनौतियों पर बात रखी गयी। इसके बाद "अक्टूबर अमर रहे !" पूंजीवाद - साम्राज्यवाद मुर्दाबाद" आदि नारों 'के मजदूर बस्तीे मे जुलूस निकाला गया

  • विचारगोष्ठी : अक्टूबर क्रान्ति के सबक

    Date:25 Oct 2017

    25 अक्टूबर 2017, बदायूं (उत्तर प्रदेश) : सांस्कृतिक मंच के साथियों द्वारा प्रस्तुत क्रांतिकारी गीत (क्रान्ति के लिए उठे कदम) के साथ इंक़लाबी मज़दूर केंद्र और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के द्वारा महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति की 100 वीं वर्षगाँठ पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन अम्बेडकर पार्क, नेकपुर, बदायूं में किया ।गोष्ठी का विषय 'अक्टूबर क्रान्ति के सबक,' था । गोष्ठी में वक्ताओं ने अक्ट 25 अक्टूबर 2017, बदायूं (उत्तर प्रदेश) : सांस्कृतिक मंच के साथियों द्वारा प्रस्तुत क्रांतिकारी गीत (क्रान्ति के लिए उठे कदम) के साथ इंक़लाबी मज़दूर केंद्र और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के द्वारा महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति की 100 वीं वर्षगाँठ पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन अम्बेडकर पार्क, नेकपुर, बदायूं में किया ।गोष्ठी का विषय 'अक्टूबर क्रान्ति के सबक,' था । गोष्ठी में वक्ताओं ने अक्टूबर क्रान्ति के इतिहास पर प्रकाश डाला ।वक्ताओं ने कहा कि पूँजीवाद अपने इतिहास के सबसे निर्मम दौर में चल रहा है। आज देश और दुनिया के मेहनतकशों के रक्त की आखरी बूँद को भी पूंजीपति वर्ग सिक्कों में ढालकर अपनी तिजोरियां भर रहा है ।मेहनतकश जनता गरीबी भुखमरी बेरोजगारी व महंगाई की मार झेल रही है। लोग अवसाद से ग्रसित हो आत्महत्याएं कर रहे हैं।दूसरी ,,ओर शासक पूंजीपति वर्ग रंगरेलियां मना रहे हैं। जनता को जाति धर्म छेत्र के आधार पर बांटकर फासीवादी ताकते सत्ता हथिया रही हैं। ऐसे में अक्तूबर क्रान्ति दुनिया भर की क्रांतिकारी जनता को अपने अपने देशों में पूँजीवाद को ध्वस्त कर समाजवादी क्रान्ति करके एक शोषण उत्पीड़न विहीन समाज बनाने की प्रेरणा देती है। आज विश्व पूँजीवाद गंभीर रूप से संकटग्रस्त है । वह जनता की कोई भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है बल्कि मजदूर वर्ग व मेहनतकश जनता ने ,, जो भी अधिकार हासिल किये वो भी लगातार छीने जा रहे हैं।पूंजीवादी राज्य के लगातार निरंकुुु,श व दमनकारी होते जाने के बावजूद धूर्त पूंजीपति वर्ग पूंजीवादी जनवाद के तारीफों के पुल बाँध रहा ह और इस अमानवीय व्य वस्था को सबसे बेहतर व्यवस्था बता रहा है।

    लेकिन इतिहास गवाह है कि पूँजीवाद जब से दुनिया में आया है तभी से पूंजीवादी रथ के पहिये आम मेहनतकश जनता के खून से रंगे हुए है। इसने जनता को जो भी रियायतें दी है मसलन सार्विक मताधिकार , महिलाओं के अधिकार, मज़दूरों के अधिकार,अन्य कल्याणकारी योजनाएं सभी कुछ कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों के नेतृत्व में चलने वाले आंदोलन और समाजवादी सोवियत संघ के दबाव के चलते दिए है क्योंकि दुनिया भर के पूंजीपति डरते थे कि अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो दुनिया के मज़दूर अक्टूबर क्रान्ति से प्रेरणा लेकर क्रान्ति कर देंगे और पूंजीपतियों के स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लेंगे। आज जब दुनिया में जब कोई भी समाजवादी राज्य मौजूद नहीं है और मज़दूर आंदोलन भी तीखा नहीं है तो पूंजीपति वर्ग इस चुनौती विहीन समय में बेख़ौफ़ होकर श्रमिक अधिकारों और जनवादी अधिकारों को रौंद रहा है। ये बात इस बात को भी साबित करती है कि जब दुनिया क्रांतिकारी दौर से गुजर रही थी तो तमाम देशों में जनता को कुछ राहत मिली । इसका मतलब है कि सुधार भी क्रान्ति का उप उत्पाद ही होते हैं।

    इसलिए अक्टूबर क्रान्ति यह प्रेरणा देती है की यदि दुनिया के मेहनतकशों को अपने अधिकारों की रक्षा करनी है तो क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ाना ही होगा और इसे मज़दूर राज समाजवाद तक ले जाना होगा तभी मज़दूर वर्ग सभी शोषितों उत्पीड़ितों के साथ साथ खुद अपने आपको भी मुक्त कर पायेगा। गोष्ठी की अध्यक्षता क्रालोस के वरिष्ठ साथी डॉ अमीर चन्द ने की संचालन कृष्ण गोपाल ने किया और कॉम निगार नफीस , छात्र नेता ओमेन्द्र, हरिओम, इमके के साथी सतीश किसान सभा के साथी प्रेमपाल आदि ने गोष्ठी को संबोधित किया। ।

    "इंक़लाब जिन्दावाद"

    "समाजवादी क्रान्ति जिन्दावाद", "पूँजीवाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद",आदि नारों के साथ गोष्ठी का समापन हुआ

  • महान अक्टूबर क्रांति शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम जारी : सेमिनार, जुलूस, गोष्टी ,सभा और पोस्टर प्रदर्शनी

    Date: 05 Nov 2017

    गुड़गांव (हरियाणा ) : इंकलाबी मजदूर केन्द्र द्वारा महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गुड़गांव (हरियाणा ) में "महान अक्टूबर क्रान्ति : उपलब्धियां ,सबक और चुनौतियां" विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया।इस सेमिनार में काफी संख्या मजदूरों,छात्रों -नौजवानों , बुद्धीजीवियों व विभिन्न मजदूर एवं जनवादी नेपाल संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की गयी। भागीदार गुड़गांव (हरियाणा ) : इंकलाबी मजदूर केन्द्र द्वारा महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गुड़गांव (हरियाणा ) में "महान अक्टूबर क्रान्ति : उपलब्धियां ,सबक और चुनौतियां" विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया।इस सेमिनार में काफी संख्या मजदूरों,छात्रों -नौजवानों , बुद्धीजीवियों व विभिन्न मजदूर एवं जनवादी नेपाल संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की गयी। भागीदार संगठनों में इ.म.के. के अलावा श्रमिक संग्राम कमेटि,मजदूर सहयोग केन्द्र ,कर्नाटक श्रमिक शक्ति, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र , परिवर्तनकामी छात्र संगठन ,क्रान्तिकारी नौजवान सभा, जन संघर्ष मंच, हरियाणा ,समता मूलक महिला संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन,कर्नाटक श्रमिक शक्ति, पी डी एफ आई व मजदूर पत्रिका के प्रतिनिधियों तथा आइसिन, बेलसोनिका,एस पी एम ,वीनस आदि कंपनियों के ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियो व मजदूरों ने भागीदारी की।

    इंकलाबी मजदूर केन्द्र द्वारा "महान अक्टूबर क्रान्ति : उपलब्धियां ,सबक और चुनौतिया" के नाम से सेमिनार पत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें अक्टूबर क्रांति के विकास क्रम,उसकी महान उपलब्धियो,इतिहास में उसकी युगांतरकारी भूमिका, सोवियत संघ में पूंजीवाद की पुनर्स्थापना के कारणो व उससे अर्जित सबकों,पूंजीवादी पुनर्स्थापना को रोकने में चीन की महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति के महत्व तथा आज के दौर में समाजवादी क्रान्ति की जरूरत व उसकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गयी ।

    सभी वक्ताओ ने अक्टूबर क्रांति के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा करते हुए समाजवाद के लिये संघर्ष की जरूरत व उसकी चुनौतियों पर बात की।कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एन टी पी सी के कारखाने .में बॉयलर फटने से हुई मजदूरों की दुखद मृत्यु पर शोक प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।

    कार्यक्रम के अंत में स्थानीय चौक तक एक जुलूस निकाला गया।मजदूर वर्ग के महान शिक्षक ,महान अक्टूबर क्रांति व सोवियत समाजवाद के नेता लेनिन ओर स्तालिन के चित्रों तथा महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति और मजदूर राज समाजवाद के जयघोष के नारों के साथ जुलूस चौक पर संक्षिप्त सभा के साथ समाप्त हुआ।

    पन्तनगर(उत्तराखंड ) , 5 नवम्बर को अक्टूबर क्रांति की सौवीं वर्षगांठ के अवसर पर इकंलाबी मजदूर केन्द्र, ठेका मजदूर कल्याण समिति, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा एक विचार गोष्ठी *क्रांति मे ट्रेड यूनियनों की भूमिका* विषय पर की गयी। गोष्ठी मे वक्ताओं ने रूसी क्रांति, चीनी क्रांति व देश की आजादी मे ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर बात की तथा वर्तमान मे मजदूर आन्दोलन के सामने खडी चुनौतियों पर बात की।

    विचार गोष्ठी शुरू मे रायबरेली स्थिति ऊंचाहार के NTPC प्लांट मे हुए बॉयलर फटने से मारे गये मजदूरों को 2 मिनचट का मौन रखकर श्रद्वांजलि दी गयी।

    विचार गोष्ठी गस्थल पर अक्टूबर क्रांति पर जारी पोस्टर प्रदर्शनी लगायी गयी।

    हरिद्वार, दिनांक 5/11/2017 को सुबह 10 बजे से 2 बजे तक स्थानीय रविदास मंदिर रावली महदूद में महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति और वर्ममान चुनौतियों नामक विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया | जिसमें इंकलाबी मजदूर केन्द्र हरिद्वार , भेल मजदूर ट्रेड यूनियन , क्रांतिकरि लोक अधिकार संगठन और सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार से मजदूर किसान छात्र नौजवानो को महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति और वर्ममान चुनौतीयो से अवगत कराया|

    रुद्रपुर (उत्तराखंड) , अक्टूबर क्रांति की शताब्दी वर्षगांठ के अवसर पर आज 5 नवम्बर 2017 को इंक़लाबी मजदूर केंद्र द्वारा सिडकुल ढाल ट्रांजिट कैम्प रुद्रपुर में पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई और सभा की गई ।सभा के दौरान रायबरेली में NTPC के प्लांट में मारे गये मजदूरों की याद में शोक ब्यक्त करते हुवे 2मिनट का मौन रखा गया और इसे मजदूरों का कत्ल करने का कुकृत्य घोषित किया गया और कहा गया कि मुनाफे की अंधी हवस में पगलाई पूंजीवादी सिस्टम के शिकार होकर मजदूरों ने असमय अपनी जान गवाई हैं ।चाहे गोरखपुर मेडिकल कालेज में मासूम बच्चों की मौतों का मामला हो ,चाहे रायबरेली की घटना हो हर जगह मजदूरों गरीबों और उनके बच्चों को ही अपनी जवान गवानी पड़ती है।भारत में मजदूरों मेहनतकशों के जीवन में बद्लाव और खुशहाली अक्टूबर क्रांति की तर्ज पर् मजदूरों के नेतृत्व में समाजवा्दी क्रांति ही ला सकती है ।

  • महान अक्टूबर क्रांति शताब्दी वर्ष के अवसर पर पोस्टर प्रदर्शनी व प्रचार अभियान

    Date:14 Oct 2017

    फरीदाबाद : इंकलाबी मजदूर केन्द्र औऱ परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष पर क्रांति का संदेश, उसका महत्व औऱ भारत जैसे देश मे उस जैसी क्रांति की जरूरत को रेखांकित करते हुए सेक्टर 24 औद्योगिक क क्षेत्र स्थित आजाद नगर मजदूर बस्ती में प्रचार अभियान चलाया। पूरी बस्ती मे अक्टूबर क्रांति पर बनी पोस्टर प्रदर्शनी को जगह-जगह लगाया गया तथा नुक्कड़ सभ फरीदाबाद : इंकलाबी मजदूर केन्द्र औऱ परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष पर क्रांति का संदेश, उसका महत्व औऱ भारत जैसे देश मे उस जैसी क्रांति की जरूरत को रेखांकित करते हुए सेक्टर 24 औद्योगिक क क्षेत्र स्थित आजाद नगर मजदूर बस्ती में प्रचार अभियान चलाया। पूरी बस्ती मे अक्टूबर क्रांति पर बनी पोस्टर प्रदर्शनी को जगह-जगह लगाया गया तथा नुक्कड़ सभा की गई । इस प्रचार अभियान मे चालीस से अधिक सदस्य, कार्यकर्ताओं भाग लिया । हाथों मे झंडे, गीत औऱ जोशीले नारों के साथ अभियान चलाया गया।

  • महान अक्टूबर क्रांति शताब्दी वर्ष के तीसरे चरण के अभियान का आगाज पोस्टर प्रदर्शनी द्वारा

    Date:02 Oct 2017

    फरीदाबाद : इंकलाबी मजदूर केन्द्र औऱ परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष पर क्रांति का संदेश, उसका महत्व औऱ भारत जैसे देश मे उस जैसी क्रांति की जरूरत को रेखांकित करते हुए सेक्टर 24 औद्योगिक क क्षेत्र स्थित आजाद नगर मजदूर बस्ती में प्रचार अभियान चलाया। पूरी बस्ती मे अक्टूबर क्रांति पर बनी पोस्टर प्रदर्शनी को जगह-जगह लगाया गया तथा नुक्कड़ सभ फरीदाबाद : इंकलाबी मजदूर केन्द्र औऱ परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष पर क्रांति का संदेश, उसका महत्व औऱ भारत जैसे देश मे उस जैसी क्रांति की जरूरत को रेखांकित करते हुए सेक्टर 24 औद्योगिक क क्षेत्र स्थित आजाद नगर मजदूर बस्ती में प्रचार अभियान चलाया। पूरी बस्ती मे अक्टूबर क्रांति पर बनी पोस्टर प्रदर्शनी को जगह-जगह लगाया गया तथा नुक्कड़ सभा की गई । इस प्रचार अभियान मे चालीस से अधिक सदस्य, कार्यकर्ताओं भाग लिया । हाथों मे झंडे, गीत औऱ जोशीले नारों के साथ अभियान चलाया गया।

  • विचार गोष्ठी: क्रान्ति मे ट्रेड यूनियनो की भूमिका

    Date:08 Oct 2017

    रुद्रपुर (उत्तराखंड) : अक्टूबर समाजवादी क्रांति की सौवीं वर्षगांठ मनाते हुए दिनांक 8 अक्टूबर को इंकलाबी मजदूर केन्द्र, इन्टरार्क मजदूर संगठन(पन्तनगर), इन्टरार्क मजदूर संगठन(किच्छा), ब्रिटानिया श्रमिक संघ, आँटोलाइन इम्पलाइज यूनियन, यजाकि वर्कर यूनियन,ठेका मजदूर कल्याण समिति पन्तनगर, प्रिकाँल मजदूर संगठन,क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, ने दिनांक मिलकर *क्रांति मे ट्रेड यूनियनो रुद्रपुर (उत्तराखंड) : अक्टूबर समाजवादी क्रांति की सौवीं वर्षगांठ मनाते हुए दिनांक 8 अक्टूबर को इंकलाबी मजदूर केन्द्र, इन्टरार्क मजदूर संगठन(पन्तनगर), इन्टरार्क मजदूर संगठन(किच्छा), ब्रिटानिया श्रमिक संघ, आँटोलाइन इम्पलाइज यूनियन, यजाकि वर्कर यूनियन,ठेका मजदूर कल्याण समिति पन्तनगर, प्रिकाँल मजदूर संगठन,क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, ने दिनांक मिलकर *क्रांति मे ट्रेड यूनियनों की भूमिका* विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार गोष्ठी मे वक्ताओं ने महान रूसी अक्टूबर समाजवादी क्रांति मे ट्रेड यूनियनों की भूमिका एवं समाजवादी राज के निर्माण व चीनी क्रांति तथा वहाँ दिनांक निर्माण मे मजदूरों और ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर चर्चा की। गोष्ठी मे ट्रेड यूनियनों के सामने वर्तमान चुनौतियों एवं कार्यभारों पर भी चर्चा की गई।

  • उधम सिंह के शहीदी दिवस पर इमके व विभिन्न यूनियनों दवारा कार्यक्रम

    Date:31 July 2017

    जलियांवाला बाग हत्याकांड की साजिश रचने वाले उस समय के पंजाब के गर्वनर माइकेल ओ ड्वायर को उसी के देश लदंन मे जाकर गोली मारकर मोोत के घाट उतारने वाले जाबांज शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस (31जुलाई) के अवसर पर इमके व विभिन्न सहयोगी यूनियनों ने शहीद उधम सिंह को याद करते हुये कार्यक्रम किये। 31जुलाई ऊधम सिंह के शहीदी दिवस पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र के सदस्यों ने ट्रांजिट कैम्प रूद्रपुर मे जलियांवाला बाग हत्याकांड की साजिश रचने वाले उस समय के पंजाब के गर्वनर माइकेल ओ ड्वायर को उसी के देश लदंन मे जाकर गोली मारकर मोोत के घाट उतारने वाले जाबांज शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस (31जुलाई) के अवसर पर इमके व विभिन्न सहयोगी यूनियनों ने शहीद उधम सिंह को याद करते हुये कार्यक्रम किये। 31जुलाई ऊधम सिंह के शहीदी दिवस पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र के सदस्यों ने ट्रांजिट कैम्प रूद्रपुर में प्रभातफेरी निकाली और सभा की। इन्टरार्क मजदूर सगंठन पन्तनगर ने प्लांट के गेट पर ऊधमसिंह की फोटो लगाकर शहीद को श्रद्धांजलि दी और ऊधम सिंह के विचारों पर चलते हुए मजदूर वर्ग की एकता, देशी विदेशी पूंजी के द्वारा किए जा रहे शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष, देश में बढती साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया। श्रद्वांजलि देने वालों मे संगठन के अध्यक्ष दलजीत सिंह , महामंत्री- सौरभ कुमार के अलावा प्लांट के सैकड़ों मजदूर शामिल थे। 31 जुलाई को ऊधम सिंह के शहीदी दिवस पर इन्टरार्क मजदूर सगंठन (किच्छा प्लांट) के मजदूरों ने प्लांट के गेट पर शहीद उधम सिंह की फोटो रखकर शहीद ऊधम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की । इन्टरार्क मजदूर सगंठन किच्छा प्लांट के अध्यक्ष राकेश कुमार ने कहा कि ऊधमसिंह जी ने जलियावाला बाग हत्याकांड की साजिश रचने वाले उस समय के पंजाब के गर्वनर माइकेल ओ ड्वायर को 13 मार्च 1940 में उसी के घर लदंन मे जाकर गोली मारकर हत्या कर जलियावाला बाग हत्याकांड का बदला लिया । इस पर अग्रेंजी हुकूमत ने ऊधमसिंह को 31 जुलाई 1940 को फांसी पर लटका दिया। इन्टरार्क मजदूर सगंठन किच्छा के महामंत्री पान मोहम्मद ने कहा कि उधम सिंह जी ने अग्रेंजी हुकूमत के बाटों और राज करो की नीति के तहत साम्प्रदायिक दंगे फैलाने के खिलाफ सघंर्ष चलाया और अपना नाम बदलकर ’राम मुहम्मद सिंह आजाद’ रखकर कौमी एकता का नारा बुलंद किया था। आज देश में बढ़ रही साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ मजदूर वर्ग को शहीद उधम सिंह के विचारों को अपनाकर संघर्ष विकसित करना होगा। यही मजदूरों की ओर से शहीद ऊधमसिंह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ऐरा श्रमिक संगठन के मजदूरों के परिजनो (महिलाओं व बच्चो)ने शहीद उधम सिंह के शहीदी दिवस पर जिला कलेक्ट्रेट में शहीद उधम सिंह की स्मृति माल्यार्पण कर उनके आदर्शो पर चलने का सन्कलप लिया। ब्रिटिश राज की तुलना आज के पूजीवादी शासन से करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने एरा मजदूरों के परिजनों खासकर बच्चों के सत्याग्रह व शासन प्रशासन दवारा इनकी लगातार उपेक्षा पर विस्तार से विमर्श किया ।गौरतलब है कि पिछले बत्तीस दिनों से जिला कलेक्टेड में ये नन्हें मुन्ने बच्चे और महिलाएं बैठी हुई है लेकिन जिला प्रशासन मालिकों के तावे में छिपा बैठा है। एरा कम्पनी के मजदूरों को पिछले 5 माह का वेतन नहीं मिला है । 25 जनवरी 2017 से कम्पनी मे बिजली पानी कटी है ,उत्पादन बंद है, मजदूर रोज सुबह 9:00 बजे डयूटी पर जाते हैं सांय 6:00 बजे वापस घर लौटते हैं। पिछले5 माह से वेतन नही मिलने से मजदूरों के बच्चों का स्कूल बंद है। घर पर भूखों मरने की हालत है। इसी कारण एरा मजदूरों के बीबी बच्चों ने 30 जून 2017 से जिलाधिकारी उधम सिंह नगर के आँफिस के बाहर धारा 144 को तोड़कर धरना दिया है। महिलाओं और बच्चों के धरने के दवाब में ALC द्वारा वेतन हेतु कम्पनी की RC काटी हैं। लेकिन जिला प्रशासन कम्पनी से वेतन की रिकबरी करने में हीलाहवाली कर रहा है। आज 31 जुलाई को भी महिलाओं और बच्चों ने शहीद उधम सिंह की तस्वीर व अपनी मांगों को लेकर जुलूस निकाला जुलूस पश्चात जिलाधिकारी आँफिस के सामने लगी शहीद उधम सिंह की प्रतिमा पर माल्याघर्पण कर शहीद उधम सिंह को उनके शहीदी दिवस (31 जुलाई) को श्रद्वाजंलि दी और सभा कीः

  • मारुति मजदूरों की सजा के प्रतिवाद में सेमिनार

    Date:16 Apr 2017

    13 मारुति मजदूरों के खिलाफ गुड़गांव जिला न्यायालय द्वारा उम्रकैद एवं अन्य 18 के खिलाफ कठोर दंड कें प्रतिवाद स्वरूप इंकलाबी मजदूर केन्द्र द्वारा फरीदाबाद (हरियाणा) एवं काशीपुर (उत्तराखंड) में सेमिनार आयोजित किये गये।

    फरीदाबाद में स्थानीय सेक्टर 24 औद्योगिक इलाके में सामुदायिक भवन में 16 अप्रैल को ‘‘मारुति मजदूरों का संघर्ष और राजसत्ता की भूमिका’’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गय 13 मारुति मजदूरों के खिलाफ गुड़गांव जिला न्यायालय द्वारा उम्रकैद एवं अन्य 18 के खिलाफ कठोर दंड कें प्रतिवाद स्वरूप इंकलाबी मजदूर केन्द्र द्वारा फरीदाबाद (हरियाणा) एवं काशीपुर (उत्तराखंड) में सेमिनार आयोजित किये गये।

    फरीदाबाद में स्थानीय सेक्टर 24 औद्योगिक इलाके में सामुदायिक भवन में 16 अप्रैल को ‘‘मारुति मजदूरों का संघर्ष और राजसत्ता की भूमिका’’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में इमके द्वारा विषय के अनुरूप शीर्षक से सेमिनार प्रस्तुत किया गया।

    सेमिनार पत्र में मारुति मजदूरों को सुनाई गयी सजा को मजदूर आंदोलन को दबाने तथा मजदूरों को सबक सिखाने की नीयत से पूंजीपति वर्ग के दिशा निर्देश पर सुनाया गया फैसला बताया। सेमिनार पत्र में विस्तार से मारुति मजदूरों के संघर्ष के महत्व व उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यूनियन बनाने के अधिकार, ठेकेदारी व स्थायी मजदूरों की संग्रामी एकता व संघर्ष व परंपरागत अप्रभावी तरीकों को तोड़कर नये जुझारू रूप अपनाने, व्यवस्थापरस्त ट्रेड यूनियन केन्द्रों के प्रभाव में न आने के चलते यह आंदोलन मारुति प्रबंधन सहित समस्त पूंजीपति वर्ग के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया था। मारुति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) आर. सी. भार्गव ने इसे वर्ग संघर्ष की संज्ञा उचित ही दी थी। सेमिनार पत्र में मारुति मजदूरों पर लगाये गये फर्जी मुकदमों एवं अदालत की कार्यवाही को नाटक करार देते हुए कहा गया कि अभियोजन पक्ष के हास्यपद तथ्यों, सबूतों व गवाहों के मुकदमे के दौरान कहीं नहीं टिक पाने एवं स्वयं न्यायाधीश महोदय द्वारा उनके फर्जी होने को स्वीकारे जाने के बावजूद मारुति मजदूरों को कठोर सजायें दिया जाना न्याय का उपहास है।

    सेमिनार पत्र में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, वीनस इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन वर्कर्स यूनियन, आटोलेक कर्मचारी यूनियन, सन फलेग हास्पिटल एम्पलाइज यूनियन व परिवर्तनकामी छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इमके द्वारा उत्तराखंड के काशीपुर में भी 16 अप्रैल को ‘मारुति मजदूरों को सजा एवं मजदूर वर्ग की चुनौतियां विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसी विषय पर इमके द्वारा एक पर्चा जारी कर फैक्टरी मजदूरों के बीच वितरित किया गया।

    सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, रिचा श्रमिक संगठन व परिवर्तनकामी छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने 13 मारुति मजदूरों को मिली उम्र कैद एंव 18 को कठोर सजाओं का विरोध करते हुए इसे पूंजीपति वर्ग के इशारे पर मजदूरों के साथ किया गया अन्याय बताया। वक्ताओं ने मारुति आंदोलन के महत्व व प्रासांगिकता का वर्णन करते हुए मजदूरों को दी गयी सजा को पूंजीपति वर्ग का प्रतिघात बताया। सभी वक्ताओं ने मारुति मजदूरों के संघर्ष के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए मारुति मजदूरों के न्याय के लिए संघर्ष को मजदूर वर्ग की वर्गीय एकता से पुष्ट करने की बात की।

महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी के उपलक्ष्य में सेमिनार

प्रिय साथी, मजदूर वर्ग के सच्चे हितैषियो, मजदूर वर्ग की मुक्ति एवं शोषण विहीन-वर्गविहीन, न्यायपूर्ण व बराबरी पर टिके समाज की कामना करने वालों के लिए महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति एक महान विरासत व अमूल्य थाती है। इस वर्ष पूरी दुनिया में मुक्तिकामी-परिवर्तनकामी लोग महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी मना रहे हैं। महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति 20वीं सदी की ही नही वरन मानव सभ्यता की सबसे महान क्रांति थी। इस क्रांति ने एक नए युग का आगाज किया था- पूंजीवाद, साम्राज्यवाद के खात्मे का युग, शोषण विहीन समाज का युग, संपत्ति पर आधारित गैर बराबरी की समाज व्यवस्था के खात्मे का युग। इस क्रांति के फलस्वरूप रूस में मजदूर वर्ग का राज स्थापित हुआ। धरती के एक हिस्से पर युगों-युगों से चले आ रहे गुलामी के बंधनों का खात्मा हुआ। कालांतर में समाजवादी राज्यों का एक संघ- सोवियत समाजवादी प्रजातंत्र संघ संक्षेप में सोवियत संघ बना। सोवियत संघ पूरी दुनिया के मजदूरों की विश्व पूंजीवादी व्यवस्था से विजित भूमि था। सोवियत संघ ने मानव समाज में व्याप्त तमाम समस्याओं व अपराधों को जड़मूल से समाप्त कर धरती पर एक नये स्वर्ग की कल्पना को साकार किया। सोवियत राज्य ने बेरोजगारी, नशाखोरी, भुखमरी, वेश्यावृत्ति जैसी समाजिक समास्याओं को जड़मूल से खत्म कर इन्हें इतिहास की चीज बना दिया था। निशुल्क व समान शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर हर व्यक्ति को गरीमामय रोजगार व समाजिक सुरक्षा सोवियत राज्य ने उपलब्ध करायी। मजदूर वर्ग की सत्ता के अंतर्गत सोवियत राज्य ने मजदूरों की सामूहिक सर्जना के रास्ते खोलकर विकास व उन्नति के वे मापदंण स्थापित किए जिनकी कल्पना किसी पूंजीवादी राज्य में नही की जा सकती है। महाकवि रविन्द्र टैगोर ने सोवियत संघ के बारे में अपने अनुभव को बयां करते हुए कहा ‘मैंने धरती पर स्वर्ग देखा है’। 1956 में सोवियत संघ व 1976 में चीन में पूंजीवादी पथगामियों द्वारा सत्ता पर कब्जा करने तथा मजदूर वर्ग की सत्ताओं के स्थान पर वहां पूंजीवादी पुनस्र्थापना करने के बाद दुनिया में कोई मजदूर राज या समाजवादी सत्ता नही बची। ऐतिहासिक विपर्यय के इस दौर में पूंजीपति वर्ग ने एक तरफ पूरी दुनिया के स्तर पर जहां मजदूर वर्ग पर नृशंश हमले शुरू कर दिए, मजदूरों के शोषण-उत्पीड़न को चरम पर पहुंचा दिया वहीं पूंजीपतियों के भाड़े के बुद्धिजीवियों द्वारा मजदूर वर्ग के महान क्रातिकारी नेताओं पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया। ‘समाजवाद फेल हो गया’ के नारे के साथ पूंजीवादी व्यवस्था की अमरता की घोषणाएं की जाने लगीं। लेकिन पूंजीवाद के कभी खत्म ने होने वाले अपने अंतरविरोधों के चलते मरणासन्न पूंजीवाद की प्राणांतक बीमारियों के बार-बार प्रकट होने और ताजातरीन 2007-08 से जारी वैश्विक आर्थिक संकट के चलते उनकी खुशियां काफूर हो गयी। पूंजीवाद की अजेयता व अमरता का उनका भ्रम टूटने लगा और एक बार फिर कम्युनिज्म का भूत उन्हे सताने लगा है। यह अकारण नहीं है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान दुनिया भर में माक्र्स की ‘पूंजी’ की लोकप्रियता बढ़ गयी है और शासक वर्ग के लोग भी ‘पूंजी’ के पन्ने टटोलने लगे हैं। ऐसे में महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति से प्रेरणा लेकर, उसकी उपलब्धियों को सहेजकर एवं उसकी कमियों-गलतियों से सबक लेकर 21वीं सदी में अक्टूबर क्रांति के नए संस्करण रचने तथा पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोंकने की चुनौति मजदूर वर्ग के समक्ष आन खड़ी हुई है। महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी के अवसर पर इन्हीं चिंताओं व सरोकारों से रूबरू होने के लिए इंकलाबी मजदूर केन्द्र 5 नवंबर रविवार को गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन कर रहा है। जिसमें आप सभी साथियों से भागीदारी की अपेक्षा है। *सेमिनार* *'महान अक्टूबर क्रांतिः उपलब्धियां, सबक और चुनौतियां'* *5 नवंबर, रविवार* *प्रातः 10 बजे से 4 बजे तक* *अग्रवाल धर्मशाला निकट रेलवे स्टेशन गुड़गांव(हरियाणा)* *नोटः हुड्डा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन के लिए 321 नंबर की बस लें।* *8285870597, 9540886678*

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