• ---
  • zCentury anyversary of great october revolution
    zCentury anyversary of great october revolution
    बवाना में फैक्टरी में लगी आग यह तो सरेआम की गई हत्यायें हैं

महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी के उपलक्ष्य में सेमिनार

प्रिय साथी, मजदूर वर्ग के सच्चे हितैषियो, मजदूर वर्ग की मुक्ति एवं शोषण विहीन-वर्गविहीन, न्यायपूर्ण व बराबरी पर टिके समाज की कामना करने वालों के लिए महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति एक महान विरासत व अमूल्य थाती है। इस वर्ष पूरी दुनिया में मुक्तिकामी-परिवर्तनकामी लोग महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी मना रहे हैं। महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति 20वीं सदी की ही नही वरन मानव सभ्यता की सबसे महान क्रांति थी। इस क्रांति ने एक नए युग का आगाज किया था- पूंजीवाद, साम्राज्यवाद के खात्मे का युग, शोषण विहीन समाज का युग, संपत्ति पर आधारित गैर बराबरी की समाज व्यवस्था के खात्मे का युग। इस क्रांति के फलस्वरूप रूस में मजदूर वर्ग का राज स्थापित हुआ। धरती के एक हिस्से पर युगों-युगों से चले आ रहे गुलामी के बंधनों का खात्मा हुआ। कालांतर में समाजवादी राज्यों का एक संघ- सोवियत समाजवादी प्रजातंत्र संघ संक्षेप में सोवियत संघ बना। सोवियत संघ पूरी दुनिया के मजदूरों की विश्व पूंजीवादी व्यवस्था से विजित भूमि था। सोवियत संघ ने मानव समाज में व्याप्त तमाम समस्याओं व अपराधों को जड़मूल से समाप्त कर धरती पर एक नये स्वर्ग की कल्पना को साकार किया। सोवियत राज्य ने बेरोजगारी, नशाखोरी, भुखमरी, वेश्यावृत्ति जैसी समाजिक समास्याओं को जड़मूल से खत्म कर इन्हें इतिहास की चीज बना दिया था। निशुल्क व समान शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर हर व्यक्ति को गरीमामय रोजगार व समाजिक सुरक्षा सोवियत राज्य ने उपलब्ध करायी। मजदूर वर्ग की सत्ता के अंतर्गत सोवियत राज्य ने मजदूरों की सामूहिक सर्जना के रास्ते खोलकर विकास व उन्नति के वे मापदंण स्थापित किए जिनकी कल्पना किसी पूंजीवादी राज्य में नही की जा सकती है। महाकवि रविन्द्र टैगोर ने सोवियत संघ के बारे में अपने अनुभव को बयां करते हुए कहा ‘मैंने धरती पर स्वर्ग देखा है’। 1956 में सोवियत संघ व 1976 में चीन में पूंजीवादी पथगामियों द्वारा सत्ता पर कब्जा करने तथा मजदूर वर्ग की सत्ताओं के स्थान पर वहां पूंजीवादी पुनस्र्थापना करने के बाद दुनिया में कोई मजदूर राज या समाजवादी सत्ता नही बची। ऐतिहासिक विपर्यय के इस दौर में पूंजीपति वर्ग ने एक तरफ पूरी दुनिया के स्तर पर जहां मजदूर वर्ग पर नृशंश हमले शुरू कर दिए, मजदूरों के शोषण-उत्पीड़न को चरम पर पहुंचा दिया वहीं पूंजीपतियों के भाड़े के बुद्धिजीवियों द्वारा मजदूर वर्ग के महान क्रातिकारी नेताओं पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया। ‘समाजवाद फेल हो गया’ के नारे के साथ पूंजीवादी व्यवस्था की अमरता की घोषणाएं की जाने लगीं। लेकिन पूंजीवाद के कभी खत्म ने होने वाले अपने अंतरविरोधों के चलते मरणासन्न पूंजीवाद की प्राणांतक बीमारियों के बार-बार प्रकट होने और ताजातरीन 2007-08 से जारी वैश्विक आर्थिक संकट के चलते उनकी खुशियां काफूर हो गयी। पूंजीवाद की अजेयता व अमरता का उनका भ्रम टूटने लगा और एक बार फिर कम्युनिज्म का भूत उन्हे सताने लगा है। यह अकारण नहीं है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान दुनिया भर में माक्र्स की ‘पूंजी’ की लोकप्रियता बढ़ गयी है और शासक वर्ग के लोग भी ‘पूंजी’ के पन्ने टटोलने लगे हैं। ऐसे में महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति से प्रेरणा लेकर, उसकी उपलब्धियों को सहेजकर एवं उसकी कमियों-गलतियों से सबक लेकर 21वीं सदी में अक्टूबर क्रांति के नए संस्करण रचने तथा पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोंकने की चुनौति मजदूर वर्ग के समक्ष आन खड़ी हुई है। महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी के अवसर पर इन्हीं चिंताओं व सरोकारों से रूबरू होने के लिए इंकलाबी मजदूर केन्द्र 5 नवंबर रविवार को गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन कर रहा है। जिसमें आप सभी साथियों से भागीदारी की अपेक्षा है। *सेमिनार* *'महान अक्टूबर क्रांतिः उपलब्धियां, सबक और चुनौतियां'* *5 नवंबर, रविवार* *प्रातः 10 बजे से 4 बजे तक* *अग्रवाल धर्मशाला निकट रेलवे स्टेशन गुड़गांव(हरियाणा)* *नोटः हुड्डा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन के लिए 321 नंबर की बस लें।* *8285870597, 9540886678*

Our Posters

Our News