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  • यूनियन पंजीकरण बहाली व निलंबन वापसी आदि मांगों को लेकर ओटोलाइन के मज़दूर संघर्षरत

    ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज के मजदूरों का संघर्ष

    6 दिसम्बर , सिडकुल पन्तनगर ,जिला ऊधम सिंह नगर (उत्तराखण्ड) :ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज के मजदूरों ने जुल्म- अत्याचार के खिलाफ,यूनियन पंजीकरण बहाली ,यूनियन महामंत्री की निलंबन वापसी व कार्य बहाली आदि मांगों को को लेकर अपने परिजनों खासकर,महिलाओं व बच्चों के साथ 6 दिसम्बर से कलेक्ट्रट रुद्रपुर ,जिला ऊधम सिंह नगर में अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है।

    गौरतलब है कि ऑटोलाइन के मज़दूरों की पंजीकृत यूनियन का श्रम विभाग ने कुछ तकनीकी खमियों के आधार पर पंजीकरण खरिज कर दिया है। ऑटोलाइन के संघर्षरत मज़दूरों ने सिडकुल एवम क्षेत्र की सभी यूनियनों ,संगठनों व श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर के सभी पदाधिकारियों ,मजदूर साथियों से अपील की है कि वे कलेक्ट्रेट रुद्रपुर में पहुँचकर आउटलाइन के मज़दूरों के संघर्ष को अपना समर्थन देते हुए मज़दूर वर्ग की एकजुटता प्रदर्शित करें।

  • इंट्रार्क मज़दूर संगठन ने काकोरी के शहीदों को याद किया
    मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट संघर्ष का लिया संकल्प

    इंट्रार्क मज़दूर  संगठन ने काकोरी के शहीदों को याद कियारूद्रपुर (उत्तराखंड), 3 /12/2017 को इंट्रार्क मजदूर संगठन सिडकुल पन्तनगर की आम सभा आयोजित की गई जिसमें यूनियन सदस्यों ने भारी संख्यां में भाग लिया ।आम सभा में काकोरी के शहीदों- अशफाक उल्ला खां ,रामप्रसाद बिस्मिल ,रोशन सिंह, राजेन्द्र लाहिड़ी - के बलिदान को याद किया गया।

    5 अगस्त 1925 को अशफाक उल्ला खां ,रामप्रसाद बिस्मिल ,रोशन सिंह ,चन्द्रशेखर आजाद आदि ने काकोरी नामक स्थान पर रेल को रोककर जालिम अंग्रेजों से खजाना लूटा जिसे भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है ।जालिम अंग्रेजी हुकूमत द्वारा काकोरी कांड में शामिल अशफाक उल्ला खां ,राम प्रसाद बिस्मिल ,रोशन सिंह को 19 दिसम्बर 1927 को व राजेन्द्र लाहिड़ी को 17 दिसम्बर 1927को फांसी की सजा दी गई ।काकोरी कांड में शामिल चन्द्रशेखर आजाद को अंग्रेजी हुकूमत जीते जी गिरफ्तार न कर पाई थी । काकोरी कांड के शहीद रामप्रसाद बिस्मिल द्वारा रचित क्रांतिकारी गीत --सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ,देखना है जोर कितना बाजुवे कातिल में है को आम सभा में जोशो खरोश के साथ में गाया गया ।

    इसके उपरांत सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने मोदी सरकार की घोर मजदूर विरोधी व पूंजीपरस्त नीतियों की आलोचना की। वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव कर उन्हें निष्प्रभावी बना रही है ,मजदूरों को 150 साल पीछे की स्थिति में धकेलने की साजिश रच रही है वहीं दूसरी ओर मजदूरों मेहनतकशों को जाति ,धर्म ,मजहब ,क्षेत्र ,नस्ल के नाम पर बांटकर एकता को कमजोर किया जा रहा है ।मजदूरों का ध्यान रोजी ,रोटी ,रोजगार ,शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाकर जाति ,धर्म ,मजहब के नाम पर दंगे फसाद खड़े कर नकली मुद्दों पर उलझाया जा रहा है ।कांग्रेस ,भाजपा ,सपा ,बसपा समेत सभी पूंजीवादी चुनावबाज राजनैतिक पार्टियां पूंजीपतियों की ही सेवा में लीन हैं ।ऐसी स्थितियों में अशफाक उल्ला खां और रामप्रसाद विस्मिल के दिखाए रास्ते पर चलकर मजदूरों मेहनतशों को जाति ,मजहब के नाम पर बाँटने वाली शैतानी ताकतों के मुंह पर कालिख पोतने की जरूरत है ,श्रम कानूनों में हो रहे मजदूर विरोधी बदलावों के खिलाफ संघर्ष के मैदान में उतरकर ----"अशफाक बिस्मिल के देश में धर्म का धंधा नहीं चलेगा" नारे को बुलंद कर आगे बढ़ना होगा ।"लड़ते अशफाक, बिस्मिल ,रोशन ,लाहिड़ी अत्याचार से ,होंगे सैंकड़ो पैदा उनकी रुधिर धार से"नारे की सार्थकता भी इसी में है ।आम सभा ने सिडकुल समेत पूरे देश दुनियां में मजदूर विरोधी नीतियों व शक्तियों के खिलाफ लड़ने व 8 दिसम्बर 2017 को श्रमिक संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने को पूरी शिफ्ट के साथ में शामिल होने के प्रस्तावों को पारित किया ।आम सभा को इंट्रार्क मजदूर संगठन पन्तनगर के अध्यक्ष दलजीत सिंह ,महामंत्री सौरभ कुमार ,उपाध्यक्ष प्रभात सैनी ,कोषाध्यक्ष वीरेंद्र पटेल समेत अनेक यूनियन सदस्यों इंट्रार्क मजदूर संगठन किच्छा के अध्यक्ष राकेश कुमार ,महामंत्री पान मुहम्मद ,उपाध्यक्ष सन्तोष आदि व इंकलाबी मजदूर केंद्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट ,दिनेश आदि ने सम्बोधित किया ।इंट्रार्क मजदूर संगठन, किच्छा की पूरी कार्यकारिणी इंट्रार्क मजदूर संग्ठन सिडकुल पन्तनगर की आम सभा में उपस्थित थी ।दोनों यूनियनों ने आपसी एकजुटता के महत्त्व को रेखांकित किया और भविष्य में भी एकजुट रहने का संकल्प व्यक्त किया।

  • अवैध तालाबंदी के खिलाफ मोजर बेयर के मजदूर संघर्ष की राह पर

    दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा (गौतम बुद्ध नगर,उ’प्र’) के सूरजपुर स्थित मोजर बेयर इंडिया लि के 2000 मजदूर विगत 4 नवम्बर से अवैध तालाबंदी के खिलाफ संघर्ष रत हैं।

    कंपनी द्वारा छलपूर्वक प्लांट में लाइट डीजल - आयल की व्यवस्था हेतु 2 और 3 नवम्बर की छुट्टी की घोषणा की थी लेकिन जब मजदूर 4 नवंबर को कंपनी पहुंचे तो उन्होंने गेट पर ताला लगा पाया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की सिफारिश पर उच्चतम न्यायालय द्वारा क्षेत्र के उन सभी कारखानों बंद करने की बात की गयी थी जो फरनेस आयल का इस्तेमाल करते हैं। उच्चतम न्यायालय ने फरनेंस आयल के स्थान पर लाइट डीजल आयल इस्तेमाल करने का विकल्प भी कंपनी मालिकों को दिया गया था। इसलिए जब कंपनी प्रबंधन ने 2 व 3 नवंबर की छट्टी की घोषणा की तो मजदूरो को कंपनी प्रबंधन के इरादों पर जरा भी शक नही हुआ। लेकिन धूर्त प्रबंधन ने इस मौके को तालाबंदी के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।

    ग्रेटर नोएडा में मोजर बेयर कंपनी के चारों प्लांट हैं । मोजर बेयर इंडिया लि’इसका सबसे पुराना व मुख्य प्लांट जिसमें 2000 मजदूर हैं। इस प्लांट में सी’डी’,डी’वी’डी’,पैन ड्राइव, मेमोरी चिप आदि व कम्प्यूटर एसेसरीज एवं इलेक्ट्रानिक उपकरणों का निर्माण होता है । कंपनी के इन उपकरणों का बाजार देश ही में ही नहीं बल्कि विदेश में भी है। अकूत मुनाफा कमाकर मोजर बेयर कंपनी इस प्लांट के अलावा तीन और प्लांट भी स्थापित कर लिए । मोजर बेयर इंडिया लि’(सेज डेवलेपर), मोजर बेयर सोलर लि, हेलोस फोटो वोल्टेयिक जो सोलर मॉड्यूल, फोटो वोल्टेयिक सेल आदि का उत्पादन करते हैं। ये तीनों प्लांट एक ही परसिर में स्थित हैं तथा इन तीनों प्लांटों में कुल मिलाकर 500 मजदूर काम करते हैं। तालाबंदी केवल मुख्य प्लांट में हुई है।

    पिछले समयों में सी’डी’, की मांग में कमी आने की वजह से कंपनी के मुनाफे में थोड़ा गिरावट आयी है। कंपनी प्रबंधन ने इसका बहाना बनाकर मजदूरों पर इस्तीफे का दबाव बनाता रहा है।असल में कंपनी प्रबंधन की मंशा भारी पैमाने पर छंटनी कर कंपनी में मजदूरों की संख्या को 300 से नीचे लाना है ताकि ताकि उसे मजदूरों रखने निकालने की पूरी छूट मिल जाये।

    उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौर में श्रम कानूनों में इस आशय का संशोधन पहले ही किया जा चुका है और 300 से कम मजदरों पर मजदूरों को रखने- निकालने, छंटनी, शिफ्टिंग व तालाबंदी की पूरी छूट मालिकों को हासिल है। उत्तर प्रदेश के अलावा भाजपा शाषित राज्यों में यह संशोधन हो चुका है। जाहिर है कि कि मोजर बेयर प्रबंधन की यही मंशा है।

    दूसरी बात यह है कि मोजर बेयर कंपनी में उच्च कुशल मजदूर काम करते हैं जिनमें से ज्यादातर आई टी आई, डिप्लामा हैं व कुछ बी टेक भी हैं। इन मजदूरों का वेतन 20 से 30-35 हजार हजार है जो कंपनी को आज की तारीख में बोझ मालूम पड़ रहा है। कंपनी इन उच्च कुशल मजदूरों से पल्ला झाड़कर थोड़े से कुशल मजदूरों को रखकर भारी संख्या में अकुशल मजदूरों को भरती करना चाहती है जो 6-7 हजार में उपलब्ध हैं।

    फिलहाल मजदूर अपना संघर्ष जारी रखे हैं।वे स्थानीय भाजपा सांसद व केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा व स्थानीय भाजपा विधायक तेजपाल के दर पर पर भी हो आये लेकिन कोरे आश्वाशनों के अलावा उन्हें कुछ नहीं। जिलाधिकारी व श्रम अधिकारी भी अपने को लाचार बताते हैं। बहरहाल मामला नेशनल लेबर ट्रिब्यूनल में है जिसकी सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर को है। इस सुनवाई के दौरान कंपनी के शेयर धारक कंपनी के भविष्य (चलाने या न चलाने) के बारे में निर्णय लेंगे। मजदूरों की उम्मीदें फिलहाल नेशनल लेबर ट्रिब्यूनल पर टिकी हैं।

  • दलित,उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के विरोघ में प्रदर्शन

    15,नवम्बर 2017 बढ़ती दलितों पर उत्पीड़न की घटनाओं के विरोध में दलि त उत्पीड़न विरोधी मोर्चा के नेत्तृव में सैकड़ो लोगों ने सेक्टर 12 में डी.सी. आफिस, लघु सचिवालय पर जोरदार प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम एक ग्यापन दिया । दलितों को न्याय दिलाने के लिए टीकम सिंह गौतम व प्रेम सिंह प्रेमी पिछले 28 दिनों से सचिवालय गेट के सामने धरने पर बैठे हैं । प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 1. नेहरु कालेज के प्रोफेसर रजनीश कुमार को पीटने व अपमानित करने वाले दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तुरंत गिरफ्तार किया जाए । 2. कबीर निर्णय मंदिर के प्रधान टीकम सिंह गौतम को मारने पीटने व जाति सूचक शब्दों से अपमानित करनेवालों को तुरंत गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाए । 3. सेक्टर 3 में स्थित अम्बेडकर प्रतिमा को खंडित करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई की जाय । 4. फर्जी जाति प्रमाण के जरिये फरीदाबाद की मेयर बनने वाली सुमन बाला को तुरंत बर्खास्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाये। ग्यापन को ADC जितेन्द्र दहिया ने रिसीव किया। प्रदर्शन में टीकम सिंह गौतम, प्रेम सिंह प्रेमी , रामफल जांगड़ा, वकील राजेश अहलावत, लक्ष्मण सिंह, उषा शर्मा, इंकलाबी मजदूर केंद्र के मुन्ना प्रसाद, वकील डी. के. वर्मा, वकील एच. एस. राजवंश आदि लोग मौजूद थे।

  • एम पी एम आटो के मजदूरों का संघर्ष -बतौर वर्ग संगठित होना होगा

    मानेसर (गुड़गांव) स्थित एस पी एम आटो कम्प. प्रा. लि. के मजदूरों ने अपनी यूनियन का गठन कर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया है। उन्होंने यूनियन की ओर से सामूहिक मांग पत्र दिया है। इसी के साथ प्रबंधन ने मजदूरों की एकता तोड़ने के लिए षडयंत्र, धमकी, गुंडागर्दी का सहारा लेना शुरु कर दिया है। गौरतलब है कि यह वही कंपनी है जहां इस वर्ष अप्रैल में काम के दौरान एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई थी। यहां पिछले कुछ सालों में कई मजदूरों की मृत्यु हो चुकी है। दुर्घटनाएं होना यहां बेहद आम है। यहां के अनेक मजदूरों की उंगलियां एवं हाथ कटे हुए हैं। यहां कुशल मजदूरों को भी हेल्पर के न्यूनतम वेतन पर खटाया जाता है। यह आपराधिक कंपनी मारुति, होण्डा, टोयोटा,आइसर ... इत्यादि बड़ी कंपनियों के लिए पार्टस बनाती है। जाहिर सी बात है कि कंपनी के एम.डी. एवं मालिक बतरा को शासन-प्रशासन एवं श्रव विभाग का सहयोग एवं संरक्षण प्राप्त है। जैसा कि आमतौर पर सभी पूंजीपतियों को प्राप्त होता है। ऐसे में एम पी एम आटो के मजदूरों का संघर्ष भी एकदम शुरुआत से ही कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन, श्रम विभाग, ठेकेदारों, गुण्डों सभी के खिलाफ बनना शुरु हो गया है, जैसा कि आम तौर पर सभी मजदूर संघर्षों में होता है। एम पी एम आटो के मजदूरों ने दिनांक 06.10.17 को अपनी आम सभा कर कंपनी प्रबंधन के षडयंत्रों एवं गुण्डागर्दी के समक्ष न झुकने एवं मुकाबला करने का संकल्प लिया। उन्होंने गुड़गांव, मानेसर की यूनियनों से संघर्ष में समर्थन की अपील की और उन्हें समर्थन मिल भी रहा है। आज देश दुनिया का पूंजीपति वर्ग मजदूरों पर लगातार हमलावर है। वह मजदूरों का बेलगाम, निर्मम शोषण कर अपने मुनाफे का अधिक से अधिक बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह श्रम कानूनों की बाधाओं से मुक्त होना चाहता है और यूनियन तो उसको बिलकुल बर्दाश्त नहीं है। ऐसे में यूनियन न बनने देने एवं मौजूद यूनियनों को तोड़ने अथवा पालतू बना लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार, जो कि पूंजीपति वर्ग के सबसे ज्यादा प्रतिक्रियावादी हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है, देश-दुनिया के पूंजीपति वर्ग के हितों में मुस्तैद हैं। पुलिस-प्रशासन मजदूरों के दमन के लिए हर पल हाजिर है। मारुति सुजुकी (मानेसर), आइसिन (रोहतक)....... इत्यादि के उदाहरण मजदूरों के सामने हैं। ऐसे में छुट्टे पूंजीवाद के इस दौर में केवल फैक्टरी स्तर की एकता बिलकुल नाकाफी साबित हो रही है। मजदूरों को बतौर वर्ग संगठित होकर पूंजीपति वर्ग का मुकाबला करना होगा।।

महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी के उपलक्ष्य में सेमिनार

प्रिय साथी, मजदूर वर्ग के सच्चे हितैषियो, मजदूर वर्ग की मुक्ति एवं शोषण विहीन-वर्गविहीन, न्यायपूर्ण व बराबरी पर टिके समाज की कामना करने वालों के लिए महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति एक महान विरासत व अमूल्य थाती है। इस वर्ष पूरी दुनिया में मुक्तिकामी-परिवर्तनकामी लोग महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी मना रहे हैं। महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति 20वीं सदी की ही नही वरन मानव सभ्यता की सबसे महान क्रांति थी। इस क्रांति ने एक नए युग का आगाज किया था- पूंजीवाद, साम्राज्यवाद के खात्मे का युग, शोषण विहीन समाज का युग, संपत्ति पर आधारित गैर बराबरी की समाज व्यवस्था के खात्मे का युग। इस क्रांति के फलस्वरूप रूस में मजदूर वर्ग का राज स्थापित हुआ। धरती के एक हिस्से पर युगों-युगों से चले आ रहे गुलामी के बंधनों का खात्मा हुआ। कालांतर में समाजवादी राज्यों का एक संघ- सोवियत समाजवादी प्रजातंत्र संघ संक्षेप में सोवियत संघ बना। सोवियत संघ पूरी दुनिया के मजदूरों की विश्व पूंजीवादी व्यवस्था से विजित भूमि था। सोवियत संघ ने मानव समाज में व्याप्त तमाम समस्याओं व अपराधों को जड़मूल से समाप्त कर धरती पर एक नये स्वर्ग की कल्पना को साकार किया। सोवियत राज्य ने बेरोजगारी, नशाखोरी, भुखमरी, वेश्यावृत्ति जैसी समाजिक समास्याओं को जड़मूल से खत्म कर इन्हें इतिहास की चीज बना दिया था। निशुल्क व समान शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर हर व्यक्ति को गरीमामय रोजगार व समाजिक सुरक्षा सोवियत राज्य ने उपलब्ध करायी। मजदूर वर्ग की सत्ता के अंतर्गत सोवियत राज्य ने मजदूरों की सामूहिक सर्जना के रास्ते खोलकर विकास व उन्नति के वे मापदंण स्थापित किए जिनकी कल्पना किसी पूंजीवादी राज्य में नही की जा सकती है। महाकवि रविन्द्र टैगोर ने सोवियत संघ के बारे में अपने अनुभव को बयां करते हुए कहा ‘मैंने धरती पर स्वर्ग देखा है’। 1956 में सोवियत संघ व 1976 में चीन में पूंजीवादी पथगामियों द्वारा सत्ता पर कब्जा करने तथा मजदूर वर्ग की सत्ताओं के स्थान पर वहां पूंजीवादी पुनस्र्थापना करने के बाद दुनिया में कोई मजदूर राज या समाजवादी सत्ता नही बची। ऐतिहासिक विपर्यय के इस दौर में पूंजीपति वर्ग ने एक तरफ पूरी दुनिया के स्तर पर जहां मजदूर वर्ग पर नृशंश हमले शुरू कर दिए, मजदूरों के शोषण-उत्पीड़न को चरम पर पहुंचा दिया वहीं पूंजीपतियों के भाड़े के बुद्धिजीवियों द्वारा मजदूर वर्ग के महान क्रातिकारी नेताओं पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया। ‘समाजवाद फेल हो गया’ के नारे के साथ पूंजीवादी व्यवस्था की अमरता की घोषणाएं की जाने लगीं। लेकिन पूंजीवाद के कभी खत्म ने होने वाले अपने अंतरविरोधों के चलते मरणासन्न पूंजीवाद की प्राणांतक बीमारियों के बार-बार प्रकट होने और ताजातरीन 2007-08 से जारी वैश्विक आर्थिक संकट के चलते उनकी खुशियां काफूर हो गयी। पूंजीवाद की अजेयता व अमरता का उनका भ्रम टूटने लगा और एक बार फिर कम्युनिज्म का भूत उन्हे सताने लगा है। यह अकारण नहीं है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान दुनिया भर में माक्र्स की ‘पूंजी’ की लोकप्रियता बढ़ गयी है और शासक वर्ग के लोग भी ‘पूंजी’ के पन्ने टटोलने लगे हैं। ऐसे में महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति से प्रेरणा लेकर, उसकी उपलब्धियों को सहेजकर एवं उसकी कमियों-गलतियों से सबक लेकर 21वीं सदी में अक्टूबर क्रांति के नए संस्करण रचने तथा पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोंकने की चुनौति मजदूर वर्ग के समक्ष आन खड़ी हुई है। महान अक्टूबर क्रांति की शतवार्षिकी के अवसर पर इन्हीं चिंताओं व सरोकारों से रूबरू होने के लिए इंकलाबी मजदूर केन्द्र 5 नवंबर रविवार को गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन कर रहा है। जिसमें आप सभी साथियों से भागीदारी की अपेक्षा है। *सेमिनार* *'महान अक्टूबर क्रांतिः उपलब्धियां, सबक और चुनौतियां'* *5 नवंबर, रविवार* *प्रातः 10 बजे से 4 बजे तक* *अग्रवाल धर्मशाला निकट रेलवे स्टेशन गुड़गांव(हरियाणा)* *नोटः हुड्डा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन के लिए 321 नंबर की बस लें।* *8285870597, 9540886678*

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